कोरबा, जिला कांग्रेस कार्यालय टीपी नगर कोरबा में अविभाजित मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पं. रविशंकर शुक्ल एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शहीद पं. विद्याचरण शुक्ल की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने दोनों महान नेताओं के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने पं. रविशंकर शुक्ल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे अविभाजित मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री थे। मुख्यमंत्री बनने से पूर्व उन्होंने नायब तहसीलदार एवं शिक्षक के रूप में भी सेवाएं दी थीं। उन्होंने कहा कि संसद भवन परिसर में उनकी प्रतिमा स्थापित है तथा रायपुर स्थित विश्वविद्यालय का नाम भी उनके नाम पर रखा गया है। पं. रविशंकर शुक्ल समाज सुधार एवं जनकल्याण के अग्रदूत थे, जिनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
रामपुर विधायक फुलसिंह राठिया ने शहीद विद्याचरण शुक्ल को याद करते हुए कहा कि वे छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के प्रमुख नेतृत्वकर्ताओं में शामिल थे। 25 मई 2013 को नक्सली हमले में घायल होने के बाद उनका उपचार हरियाणा के गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में चला, जहां 11 जून 2013 को उनका निधन हो गया। उनके योगदान को प्रदेश की राजनीति में हमेशा याद किया जाएगा।
पूर्व विधायक श्याम लाल कंवर ने अपने संबोधन में कहा कि विद्याचरण शुक्ल एक कुशल प्रशासक, दूरदर्शी नेता एवं उत्कृष्ट राजनेता थे। उनके निधन से प्रदेश की राजनीति में एक युग का अंत हो गया।
कार्यक्रम में जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनोज चौहान, पूर्व अध्यक्ष सपना चौहान, महिला कांग्रेस अध्यक्ष कुसुम द्विवेदी, महिला आयोग की पूर्व सदस्य अर्चना उपाध्याय, नेता प्रतिपक्ष कृपाराम साहू, मनहरण राठौर, प्रदीप पुरायणे, राकेश पंकज, पालुराम साहू, राजेंद्र तिवारी, एफ.डी. मानिकपुरी, महेंद्र थवाईत, रवि चंदेल, सुकसागर निर्मलकर, डॉ. गोपाल कुर्रे, सुभाष राठौर, दुष्यंत शर्मा, आरिफ खान, संजू अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, नारायण कुर्रे, धनंजय चंद्रा, फरियाद अली रिजवी, मस्तुल कंवर, प्रदीप जायसवाल, डॉ. रामगोपाल यादव, रमेश वर्मा, रवि खुंटे, हिमांशु सिंह, शशि अग्रवाल, देव जायसवाल, सुनील निर्मलकर, हरविंदर सिंह, सुखनंदन सिंह सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने पं. रविशंकर शुक्ल एवं पं. विद्याचरण शुक्ल के जीवन, संघर्ष और योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।




