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    Home»कोरबा»गंभीर चुनौती – शासकीय विद्यालयों के दर्ज संख्या में हो रही है लगातार गिरावट –
    कोरबा

    गंभीर चुनौती – शासकीय विद्यालयों के दर्ज संख्या में हो रही है लगातार गिरावट –

    Ramesh VermaBy Ramesh VermaJuly 18, 2026
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    कोरबा,वर्तमान सत्र में सरकारी स्कूलों में लगातार दर्ज संख्या प्रभावित होकर कम होते जा रहा है जो शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है जिसे एक तथ्यात्मक खोजपरक सर्वे रिपोर्ट अनुरूप एक क्षेत्र के संकुल स्तर की जानकारी से पूरे खंड स्तर और जिले स्तर तक की स्थिति को आसानी से समझा जा सकता है जवाली देवरी संकुल के अंतर्गत आने वाले दो दर्जन शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल ,हाई सेकेंडरी विद्यालयों के साथ-साथ केवल 2 निजी विद्यालय मां सरस्वती विद्या मंदिर बुंदेली एवं शिशु बाल मंदिर चाकाबुड़ा विद्यालय से तुलना करने पर स्पष्ट हो जाएगा कि शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या अपेक्षाकृत क्यों कम होती जा रही है जबकि निजी विद्यालयों में लगातार प्रवेश-छात्रों की संख्या बढ़ रही है ।आज से 15 – 20 वर्ष पूर्व सन् 2004 – 05 में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जवाली की दर्ज संख्या 500 से 600 के बीच रहती थी जो घटकर अब 350 उसकी आधे तक हो गई है इसकी तुलना में निजी विद्यालय बुंदेली में दर्ज संख्या 350 लगभग और निजी विद्यालय चाकाबुड़ा में दर्ज संख्या 250 लगभग हो गई है संबंधित निजी विद्यालयों के क्षेत्र शासकीय विद्यालयों में पहली कक्षा में एक भी छात्र का प्रवेश न ले पाना विवाद का विषय बना इस पर विचार करने पर शासन के द्वारा शासकीय विद्यालयों के लिए योजनाएं व उनसे संचालित कार्य ठंडे बस्ते में चले जाएंगे ।शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता जिनका बढ़ते क्रम में पर्याप्त वेतनमान होने के बावजूद अभिभावकों का विश्वास लगातार कम हो रहा है दूसरी ओर इन निजी विद्यालयों में कम पढ़े लिखे अप्रशिक्षित शिक्षक होने के साथ अल्प वेतन में भी नियमित कक्षाएं अनुशासन समयबद्ध पढ़ाई निरंतर मूल्यांकन और अभिभावकों से बेहतर संवाद के कारण उनकी लोकप्रियता दिन प्रतिदिन बढ़ रही है एक महत्वपूर्ण प्रश्न चिन्ह यह भी है कि अधिकतर सरकारी शिक्षक स्वयं अपने बच्चों का प्रवेश निजी विद्यालयों में कराते हैं इसे आम अभिभावकों के बीच यह संदेश जाता है कि यदि शिक्षक स्वयं सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था पर पूर्ण भरोसा नहीं जता रहे हैं तो वह अपने बच्चों को वहां क्यों पढ़ाएं जिसका सीधा असर सरकारी स्कूलों में प्रवेश में पढ़ रहा है ग्रामीण क्षेत्रों में कई सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या इतनी कम हो गई है की कक्षाओं का संचालन प्रभावित हो रहा है कुछ स्थानों पर एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं को एक साथ पढ़ाना पड़ता है जिससे शिक्षक की गुणवत्ता प्रभावित होती है शिक्षा से जुड़े जानकारों के अनुसार सरकारी विद्यालयों में घटते प्रवेश के पीछे के कई अन्य कारण भी है जिसमें समय पर शिक्षकों की उपलब्धता शैक्षणिक गतिविधियों में कमी,विद्यार्थियों की नियमित निगरानी का अभाव ,अंग्रेजी माध्यम के प्रति बढ़ती लोकप्रियता,निजी विद्यालयों का प्रभावी प्रचार प्रसार,अभिभावकों से सीमित संवाद,आधारभूत सुविधाओं की कमी,तकनीकी कंप्यूटर क्षेत्र पर बढ़ता आकर्षण तथा जवाब देही का कमजोर होना शामिल है ।यदि सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ानी है तो केवल भवन और शासकीय योजनाओं पर्याप्त नहीं होगी शासन की द्वारा चलाई जाने वाले जैसे प्रवेश उत्सव,स्कूल चले अभियान,निःशुल्क शिक्षा , गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, नियमित से शैक्षणिक गतिविधियां बेहतर अनुशासन,पारदर्शी मूल्यांकन ,अभिभावकों का विश्वास जीतने के प्रयास तथा शिक्षकों की जवाब देही सुनिश्चित करनी होगी साथ ही सरकारी शिक्षकों द्वारा अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में पढ़ाने जैसी सकारात्मक पहल भी समझ में विश्वास बहाल करने का माध्यम बन सकती है यदि समय रहती इस चुनौती का समाधान नहीं किया गया तो सरकारी विद्यालयों में घटती छात्र संख्या आने वाले वर्षों में शिक्षा व्यवस्था के लिए और अधिक गंभीर संकट का रूप ले सकती है ।

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