0 सिर की गंभीर चोट से जूझ रही महिला को दिया नया जीवन
कोरबा ,अक्सर कहावत सुनी जाती है—“चूना लगे न फिटकरी, रंग चोखा आए” यानी बिना किसी बड़े खर्च और तामझाम के सबसे बेहतरीन परिणाम मिल जाना। कुछ ऐसा ही अनोखा और चमत्कारी मामला कोरबा के प्रसिद्ध शिवाय हॉस्पिटल से सामने आया है, जहाँ एक महिला मरीज को बिना किसी जटिल ऑपरेशन और बिना वेंटिलेटर के पूरी तरह स्वस्थ कर दिया गया।
क्या था पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, आरामशीन (कोरबा, छत्तीसगढ़) की रहने वाली श्रीमती बुंदकुंअर कैवर्त्य (पति संतोष कुमार) के सिर पर गंभीर चोट लगी थी। हादसे के बाद उन्हें बेहद नाजुक हालत में शिवाय हॉस्पिटल लाया गया था। सिर की चोट इतनी गंभीर थी कि आमतौर पर ऐसे मामलों में मरीज को तुरंत वेंटिलेटर (जीवन रक्षक प्रणाली) पर रखना पड़ता है या फिर एक बड़ा न्यूरो-ऑपरेशन (सिर की सर्जरी) करना पड़ता है, जो बेहद खर्चीला और जोखिम भरा होता है।
डॉ. दिविक मित्तल की सूझबूझ से टला बड़ा खतरा
अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरो सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. दिविक मित्तल ने मरीज की स्थिति की बारीकी से जांच की। उन्होंने अपनी विशेषज्ञता और सटीक चिकित्सा सूझबूझ का परिचय देते हुए तुरंत ऑपरेशन या वेंटिलेटर का सहारा लेने के बजाय, एक विशेष और सटीक मेडिकल मैनेजमेंट (उपचार पद्धति) अपनाने का निर्णय लिया।
डॉ. मित्तल की देखरेख में चले इस विशेष उपचार का असर जादू की तरह हुआ। बिना किसी सर्जरी के और बिना वेंटिलेटर पर रखे ही, मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार होने लगा।
परिजनों ने जताया आभार, क्षेत्र में तारीफ
डॉ. दिविक मित्तल के इस सफल और किफायती उपचार की बदौलत श्रीमती बुंदकुंअर कैवर्त्य अब पूरी तरह खतरे से बाहर और स्वस्थ हैं। मरीज के पति संतोष कुमार और अन्य परिजनों ने शिवाय हॉस्पिटल के प्रबंधन और डॉ. मित्तल के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है। परिजनों का कहना है कि डॉ. मित्तल ने न सिर्फ मरीज की जान बचाई, बल्कि उन्हें एक बड़े और मानसिक व आर्थिक रूप से थका देने वाले ऑपरेशन के दर्द से भी बचा लिया।
शिवाय हॉस्पिटल का यह प्रयास साबित करता है कि सही समय पर सही विशेषज्ञ की सलाह मिले, तो बिना वेंटिलेटर और बिना ऑपरेशन के भी गंभीर से गंभीर न्यूरो मामलों को ठीक किया जा सकता है।



