
0 पानी से लबालब भरी नदी से हो रही रेत की तस्करी
मजूदरों की जान जोखिम में, ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों की उड़ रही धज्जियां
0 डुड़गा के निकट नदी घाट में सुबह से लगती है ट्रैक्टरों की कतार

कोरबा, इन दिनों रेत माफिया सक्रिय हो गए हैं प्रतिबंध के बाद भी प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टर रेत रेत घाट से निकल रहे हैं विभागीय कार्रवाई नहीं होने से इन रेत माफिया के हौसले बुलंद है नगर पालिका निगम के वार्ड क्रमांक 3 राताखार रेत घाट में रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद है कि रात 10:00 बजे से सुबह 4:00 बजे तक सैकड़ों ट्रैक्टर रेत की चोरी करने में लगे हुए हैं सूत्रों के अनुसार रेत माफियाओं द्वारा ट्रैक्टर मालिको से 7000 रुपए रेत दलालों के द्वारा लिया जा रहा है बताया जा रहा है पहले ट्रैक्टर रेत दलाल द्वारा 5000 रुपए लिया जा रहा था लेकिन एक माह से रेत दलाल द्वारा अपना रेट बढ़ा दिया गया है ट्रैक्टर मालिक द्वारा रुपए नहीं दिए जाने पर ट्रैक्टर के पहिए, बैटरी सहित अन्य सामग्री को रेत दलाल द्वारा निकाल लिया जाता है और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है मजबूर होकर ट्रैक्टर मालिक द्वारा रेत दलालों को वाहन चलाने से पहले रुपए दिया जाता है इसके बाद ही रेत घाट में प्रवेश दिया जाता है
इसी तरह उफनती नदी से रेत निकाली जा रही है। कटघोरा के निकट ग्राम डुड़गा से लगे अहिरन नदी में सुबह से रेत निकालने के लिए ट्रैक्टर की कतार लग जाती है। लगभग पांच हजार रूपये ट्रैक्टर में बिक रहे रेत को लेकर माफिया सक्रिय हो गए हैं। रेत चोरी के लिए मजूदरों के जान को जोखिम में डाला जा रहा है।
खुलेआम हो रही रेत के अवैध उत्खनन व परिवहन ने जिला खनिज विभाग के अधिकारियों के निष्क्रयता की पोल खोल कर रख दी है। जिले में खंड वर्षा का दौर जा रही है। ऐसे मेें छोटे नदी व नालों में पानी का बहाव बढ़ गया है। इसके साथ ही नदी में रेत आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। नदियों के तटों को काटकर वाहन ट्रैक्टर व अन्य वाहनों के आवागन के लिए राह बनाया है। बींझपुर, जटांगपुर, डुड़गा, कसनिया आदि ऐसी जगह हैं जहां दिन रात रेत की ढुलाई ट्रैक्टर से हो रही है। उपनगरीय क्षेत्र के अलावा शहरी के निकट से होकर निकलने वाली हसदेव नदी से भी रेत का उत्खनन किया जा रहा रहा है। दिन में नदी से रेत निकाल कर डंप कर दिया जाता है, जिसे रात में परिवहन किया जाता है।
बताना होगा कि वर्षा जारी होने के कारण खनिज ने 15 जून से 16 अक्टूबर तक नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अनुसार रेत की खुदाई और परिवहन प्रतिबंधित है। इसके बाद भी घाटों से गीले रेत को निकालने का क्रम जारी है। पूरे मामले मे गौर किया जाए तो खनिज माफिया संगठित होकर रेत परिवहन कर रहे हैं। अवैध परविहन का दुखद पहलू यह कि वाहन मालिक मजदूर व चालक को अधिक मजदूरी का लालच देकर उनके जान को जोखिम में डाल रहे है। जमीन गीली होने और जोखिम भरे मार्ग से रेत की ढुलाई किए जाने से ट्रैक्टर के पलटने का खतरा भी बना है। ऐसे में बड़ी दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई है। जिला खनिज अधिकारी का कहना है कि विभागीय स्तर पर लगातार कार्रवाई किया जा रही हैं। अहिरन व हसदेव नदी से रेत चोरी की शिकायत मिल रही है। विभाग ने औचक निरीक्षण के लिए टीम गठित किया गया है।
बारिश के समय चोरी में इजाफा नई बात नही है। प्रकरण में और भी इजाफा हो सकता है। टास्क फोर्स समिति की ओर से सहयोग नहीं किए जाने कारण रेत के अवैध परिवहन का कारोबार फल-फूल रहा है। टास्क फोर्स में खनिज के अलावा वन और पुलिस विभाग को भी शामिल किया गया है। ज्यादातर खनिज का अवैध परिवहन वन मार्गों से होती है जिसमें विभागीय अधिकारियों की ओर से कार्रवाई नहीं की जाती।
रेत की चोरी शहरी के अलावा गामीण और उपनगरीय क्षेत्रों में ही किया जा रहा। जुलाई माह की शुरूआत से अब तक खनिज विभाग की ओर दर्ज 82 में 49 प्रकरण केवल शहरी क्षेत्र के ही हैं। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि फिल्ड अधिकारियों की कार्रवाई केवल सीमित क्षेत्र में ही है। जितने जटिल शहरी क्षेत्र के घाट हैं उससे अधिक सरल गांव के नदी तट के घाट हैं। जिससे सहूलियत से रेती मिल जाती है। यही वजह है कि हाइवा से भी रेत की आपूर्ति ग्रामीण क्षेत्रों से हो रही है। धनगांव मार्ग से रेत से भारी वाहनों से रेत सप्लाई किया जा रहा है।











