हमें नहीं है किसी की परवाह, सब कुछ सेटिंग में चल रहा है, खुले आम हो रही अवैध रेत उत्खनन , मूक दर्शक बनी खनिज विभाग

कोरबा,बेशक सरकार बदल गई हो, पर कमान किसी की भी हो, खनिज विभाग को चुनौती देते हुए उसके सामने बेधड़क रेत का परिवहन हो रहा है और प्रशासन मूक दर्शक बने है, अवैध कारोबार के सिलसिले पर कोई असर नजर नहीं आता। कुछ ऐसा ही नजारा शहर की सड़कों पर उस वक्त देखने को मिलता है, जब चौक चौराहों से रेत उड़ाते ट्रैक्टर गुजरते हैं।, रेत माफिया को किसी की परवाह नहीं है क्योंकि नीचे से लेकर ऊपर तक रेत माफियाओं द्वारा रुपए पहुंचाया जा रहा है रेत माफिया कहते हैं कि सब कुछ सेटिंग है तो हमें किस चीज की परवाह आप सभी देख सकते हैं कि किस तरीके अवैध रेत उत्खनन किया जा रहा है इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि किस हद तक रेत माफिया द्वारा सेटिंग किया गया है क्योंकि बड़े स्तर पर यह खेल चल रहा है खासकर राताखार में रात 10:00 बजे के बाद अवैध रूप से रेत का उत्खनन किया जा रहा है खनिज विभाग का रेत माफियाओं को संरक्षण मिल रहा है जिसका लाभ रेत माफिया द्वारा उठाया जा रहे हैं आए दिन किसी न किसी बात को लेकर रेत माफियाओं द्वारा विवाद करते हैं और बेधड़क अवैध उत्खनन कर मोटी रकम पर रेत को खपाया जा रहा है
अवैध उत्खनन और परिवहन का दौर जिस बेधड़क अंदाज में जारी है, उससे ऐसा प्रतीत होता है, मानों रेत घाट से लेकर सड़कों तक सरकार या प्रशासन का नहीं, बल्कि रेत माफिया का ही राज हो। कांग्रेस शासन में जिस दुस्साहसिक ढंग से रेत तस्करों की सक्रियता रही, ताजा काबिज भाजपा की सरकार में भी प्रशासन के बेपरवाह रवैये के चलते इनके हौसले बुलंद दिखाई दे रहे हैं।
इन दिनों जल स्तर बढ़ा होने के बावजूद नदी-नालों से ज्यादा शहर की सड़कों पर रेत उड़ती देखी जा सकती है। रात का अंधेरा ही नही, दिन दहाड़े आम राहगीरों की आंख में किरकिरी तो परिवहन और खनिज विभाग की आंखों में धूल झोंकते हुए रेत तस्कर बेधड़क अपना गोरखधंधा चमका रहे हैं। तमाम प्रशसनिक व्यवस्था, अधिकारियों और अमले से लैस जिला मुख्यालय में सबसे ज्यादा अफरा तफरी प्रतिदिन देखी जा सकती है।




