अधूरे काम के भुगतान की तैयारी में सीएसईबी के अधिकारी,10 साल पुराने काम की कर रहे समीक्षा
चढ़ावा ले कर रहे काला पीला एक बराबर

कोरबा, विगत सालो में कोरबा जिले सहित बिलासपुर संभाग को विद्युत सुविधा सुचारू रूप से चलाने के लिए आई पी डी एस योजना चलाई गई थी जिसमे नगर निगम सहित कोरबा जिले के सभी ब्लॉक में 11 के व्ही लाइन, लोड युक्त ट्रांसफार्मर,एल टी लाइन विस्तार,33/11 केवीए नए सबस्टेशन सहित नए ट्रान्सफार्मर के कार्य स्थानीय ठेकेदारों से कराए गए। जिसका ठेका दिल्ली की कंपनी ए टू जेड इंफ्रास्ट्रक्चर को मिला। कार्य के शुरुवाती दौर में कंपनी अपना काम 2 वर्ष बाद काम करने में रुचि ली। जो कार्य अपनी अवधि में समाप्त हो जाना था वह कार्य पैसा दे कर बढ़ाया गया जिसमें सी एस ई बी के मुख्यालय में में पदस्थ अधिकारियों का रोल महत्वपूर्ण माना जा रहा है यदि देखा जाए तो छत्तीसगढ़ में 2 हजार करोड़ से ऊपर का घोटाला शराब में हुआ है उससे कही अधिक घोटाला विद्युत वितरण कंपनी में हो सकता है।
इधर मुख्यालय से प्राप्त आदेश के बाद वर्तमान में पदस्थ अधिकारी सब काम छोड़ कर उस कंपनी के कार्यो की समीक्ष करने में जुटे है।जबकि इस कार्य की समीक्ष कार्य करते समय ही हो जानी थी, अब अधिकारीगण अपने मैदानी अमला जो विद्युत सुधार में लगे है उन्हें लगा कर अधूरे कार्यों का बकाया पैसा देने की तैयारी में जुट गए उनको मालूम है कि एक चिड़िया बैठने में लाखों का वारा न्यारा हो सकता है तो क्यों ना जिला अंधेरे में रहे अपने घर तो लक्ष्मी की चमक बन रही है। इसी तर्ज में 10 साल पुराने काम की समीक्षा, जी पी एस लोकेशन सहित ए टू जेड कंपनी दिल्ली के लिए रायपुर से कोरबा तक के अधिकारी एकजुट हुए पड़े है यदि इन अधिकारियों पर भी ईडी जांच बैठ जाये तो अनेकोनेक मुफ्तखोर और कमीशन मामा की पोल खुल जाएगी। इस मामले में जिले के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई पर उनका जवाब भी गोलमोल पाया गया। यदि इनपर कड़ी कार्यवाही होती हैं तो छत्तीसगढ़ में बाहर से आई फर्जी कंपनी के साथ लोकल स्तर के ठेकेदारों को जो अधूरे काम और बिना काम के बिल लगा कर जिले को छल कर भाग गए है, उन्हें भी सबक मिलेगा की छत्तीसगढ़ को ठगना आसान नही है।



