
कोरबा, शासकीय ईवी पीजी कॉलेज में आयोजित “नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान” कार्यक्रम के बाद जिला पंचायत के नवपदस्थ मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) एवं आईएएस अधिकारी प्रतीक जैन और महाविद्यालय प्रबंधन के बीच विवाद गहरा गया है। कॉलेज के प्राचार्य, प्राध्यापकों और कर्मचारियों ने सीईओ पर सार्वजनिक रूप से दुर्व्यवहार करने तथा निलंबन की धमकी देने का आरोप लगाते हुए कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, रविवार को महाविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन, कलेक्टर कुणाल दुदावत, जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन सहित जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। महाविद्यालय प्रबंधन का आरोप है कि कार्यक्रम शुरू होने से लगभग आधा घंटा पहले पहुंचे सीईओ व्यवस्थाओं को लेकर नाराज हो गए और विद्यार्थियों तथा अन्य लोगों की मौजूदगी में प्राचार्य एवं शिक्षकों के साथ अभद्र व्यवहार किया। आरोप है कि उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबन तक की चेतावनी भी दी।
सोमवार को महाविद्यालय के समस्त कर्मचारियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि कार्यक्रम का आयोजन जिला प्रशासन द्वारा किया गया था तथा कॉलेज प्रशासन ने केवल परिसर उपलब्ध कराया था। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन और महाविद्यालय प्रबंधन के बीच पर्याप्त समन्वय नहीं था। इसके बावजूद व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन पर डालते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ अनुचित व्यवहार किया गया।
वहीं जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन ने लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि कार्यक्रम की व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं थीं और उन्होंने केवल उन्हें सुधारने के निर्देश दिए थे। सीईओ का दावा है कि इसी दौरान महाविद्यालय के एक सहायक प्राध्यापक ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। उन्होंने यह भी बताया कि महाविद्यालय प्रबंधन द्वारा कलेक्टर को माफीनामा सौंपा गया है। साथ ही पूरे घटनाक्रम की जानकारी उच्च शिक्षा आयुक्त को भेजकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया गया है।
फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। एक ओर महाविद्यालय का स्टाफ सीईओ के खिलाफ कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सीईओ ने भी मामले को उच्च स्तर पर उठाया है। ऐसे में अब इस पूरे विवाद में जिला प्रशासन की जांच और आगामी कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।




