

कोरबा,आज गांव के हर गलियों में ऐसे अनेक बच्चे दिखाई देते हैं जो खाली समय का अधिकांश हिस्सा मोबाइल गेम खेलने में बिताते हैं जैसे अनेक बड़े लोग भी मंचों में, बैठक स्थलों में,दुकान चौक चौराहों में ताश के पत्तो और गांजा – चोंगी के नशे में व्यस्त रहते हैं वैसे ही उनके देखादेखी यह बच्चे भी मोबाइल में मस्त रहते हैं। ऐसा ही नजारा ग्राम जवाली के बरगद पेड़ के नीचे विद्यालय से आधे छुट्टी में भाग कर आए हुए कुछ बच्चे जिसमें विकास कुमार वासु ,शेरा,रुस्तम112,कुलदीप व अन्य बड़े बच्चो में दीपक,विनय ग्रुप में मोबाइल गेम खेलते हुये बात करते करते बीच में गालियों की आवाज से धड़ धड़ धड़ धड़ मारना बे… बचाना रे….. की आवाज सुनकर देखा ऐसा नही कि यह पहली बार है केवल ये ही बच्चे प्रभावित है ये सिर्फ एक जीता जागता उदाहरण है अब तो गाँव के हर गलियों मे ऐसे दो-चार बच्चों को हाथ में मोबाइल पकड़कर ऐसा गेम शान के साथ बिना डरे खेलते हुए देखा जा सकता है ।आज के डिजिटल युग में मोबाइल बच्चों के जीवन का एक सामान्य हिस्सा तो बन गया है शिक्षा,जानकारी और मनोरंजन की अनेक साधन इसमें उपलब्ध है लेकिन जब बच्चे केवल पढ़ाई को छोड़कर घंटे तक पबजी – फ्री फायर अन्य ऑनलाइन गेम खेलने लगते हैं तब यह चिंता का विषय बन जाता है । शासन द्वारा कोरोना काल में इन बच्चों की शिक्षा बाधित न हो इसलिए ऑनलाइन पढ़ाई को अनिवार्य किया गया मोबाइल और इंटरनेट शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बनी लेकिन इसका दूसरा पक्ष भी सामने आया अधिकतर बच्चे पढ़ाई की बजाय घंटों मोबाइल गेम, सोशल मीडिया और अन्य मनोरंजक गतिविधियों में समय बिताने लगे बुरा प्रभाव बहुत सारे दुर्घटनाएं होने लगे है इससे अब कई परिवारों में तनाव और चिंता बढ़ने लगी है माता-पिता भी अब असमंजस में है जिस मोबाइल को उन्होंने शिक्षा के लिए अन्य आवश्यक कार्य हेतु खरीदा था वही अब परेशानी का सबक बन गया है । बच्चों के लिए मनोरंजन और लत का माध्यम बन गया है केवल डांटने या उनसे मोबाइल छीन लेने से समस्या का समाधान नहीं होगा आवश्यकता है कि प्रत्येक प्रभावित परिवार बच्चों के साथ समय बिताए,उनकी दिनचर्या पर ध्यान दें पुस्तक पठन,रचनात्मक गतिविधियों और नैतिक संस्कारों के लिए प्रेरित करें समझाए कि ऑनलाइन गेम का उद्देश्य मनोरंजन होना चाहिए ना कि जीवन का केंद्र बच्चों को यह भी समझाना आवश्यक है कि वास्तविक जीवन उपलब्धियां अनुशासन शिक्षा और अच्छे संस्कार ही उनके उज्जवल भविष्य के लिए माता-पिता को भी बच्चों के साथ रहना चाहिए उनके मित्र बनकर उनकी रुचियां को समझना चाहिए और मोबाइल के उपयोग लिए संतुलित नियम निर्धारित करनी चाहिए साथ ही बच्चों को पुस्तक पठन,संगीत चित्रकला और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित करना चाहिए । तकनीक स्वयं समस्या नहीं है उसका असंतुलित उपयोग समस्या बन जाता है यदि मोबाइल और ऑनलाइन गेम समय और सही उद्देश्य के लिए किया जाए तो वह उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं ।बच्चों को तकनीकी का सही प्रयोग सीखने मोबाइल ज्ञान का साधन बने ना कि भविष्य बिगाड्ने का कारण बच्चों को यह समझना होगा खेल जीवन का हिस्सा हो सकता है लेकिन शिक्षा स्वास्थ्य संस्कार और परिवार से बढ़कर मोबाइल नहीं है तो समय रहते संभलने की जरूरत है ।
“पबजी के शेर अधिकतर पढ़ाई लिखाई में हो जाते हैं क्यो ढेर”
” जिसके कारण करते रहते है वो हरदम माता-पिता से बैर”
“जो पब्जी फ्री फायर रिल्स का ज्यादा हुआ तो वो किसी और का नहीं हुआ”
यह पंक्तियां केवल व्यंग नहीं आज के समय की एक गम्भीर चिंता की ओर संकेत करती है । अतःविद्यालय,अभिभावक और समाज तीनो की साझा जिम्मेदारी है कि बच्चो को तकनीक का सही उपयोग सिखाएँ मोबाइल को ज्ञान का साधन बनाए ना कि भविष्य बिगाड़ने का कारण ।




