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    Home»कोरबा»स्थानीय प्रतिभाओं के साथ बालको लिख रहा है आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की इबारत
    कोरबा

    स्थानीय प्रतिभाओं के साथ बालको लिख रहा है आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की इबारत

    Ramesh VermaBy Ramesh VermaJanuary 19, 2026
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    कोरबा, आज के समय में बेहतर करियर के लिए युवाओं को अक्सर अपने परिवार, गाँव-शहर और जड़ों से दूर जाना पड़ता है। करियर के अवसर और अपनों के साथ रहने के बीच चयन करना आज के युवाओं के लिए एक आम दुविधा बन गया है। छत्तीसगढ़ की एकमात्र एल्यूमिनियम उत्पादक कंपनी बालको इस धारणा को बदलते हुए राज्य में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही है। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को बिना अपने राज्य से बाहर गए, अपने घर के पास रहते हुए आगे बढ़ने का अवसर मिला है।

    बालको ने विस्तार परियोजना, आधुनिक तकनीक और कौशल विकास में लगातार निवेश किया है। इससे इंजीनियरिंग, प्रचालन, रखरखाव, सुरक्षा, प्रशासन, सामुदायिक विकास और अन्य क्षेत्रों में अच्छे रोजगार के अवसर बने हैं। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को राज्य से बाहर जाए बिना ही बड़े और वैश्विक स्तर के काम करने का मौका मिल रहा है।

    युवाओं के लिए बालको में नौकरी सिर्फ एक रोजगार नहीं, बल्कि परिवार के सपनों की पूर्ति है। इन्हीं में से एक रायगढ़ के रिशोरा गांव की रहने वाली स्मिता प्रधान, जो बालको में जूनियर एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, वे कहती हैं कि जब मैंने अपने माता-पिता को बताया कि मेरा चयन बालको में हो गया है, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उनके लिए यह सपना सच होने जैसा था कि उनकी बेटी छत्तीसगढ़ में रहकर ही अपना भविष्य बना रही है। तीन साल के अनुभव को साझा करते हुए स्मिता बताती हैं कि मुझे कभी नहीं लगा कि मेट्रो शहर में काम न करने से मैं कुछ खो रही हूं। मैं यहां लगातार सीखते हुए आगे बढ़ रही हूं, इसके लिए मैं कंपनी की बेहद आभारी हूं।

    इसी तरह रायगढ़ की मिथिला प्रधान, जो पॉटलाइन में जूनियर एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं। वे बताती हैं कि रसायन विज्ञान में मास्टर्स करते समय मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे इतना आधुनिक और औद्योगिक वातावरण मिलेगा। यहाँ हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता है, जो मेरे भविष्य को आकार दे रहा है। साथ ही अपने जड़ों से जुड़े रहते हुए आगे बढ़ना मेरे लिए बेहद संतोषजनक है।
    फाउंड्री में शिफ्ट इंचार्ज देवाशीष पटेल के लिए बालको का माहौल उनके कॉलेज के दिनों की याद दिलाता है। वे कहते हैं कि यहां सीखने का तरीका बहुत सहयोगात्मक और व्यावहारिक है। काम के बाद टाउनशिप के खुले और हरित वातावरण में समय बिताना उन्हें सुकून देता है। बालको अस्पताल के बारे में वे बताते हैं कि मेरे माता-पिता को नियमित स्वास्थ्य सुविधा मिलती है, इससे मुझे बहुत मानसिक शांति मिलती है।

    बेक ओवन में कार्यरत पीजीटी मनीष कुमार पटेल बताते हैं कि बालको छत्तीसगढ़ के कॉलेजों से युवाओं को अवसर देता आ रहा है। वे कहते हैं कि जो अवसर पहले दूर लगते थे, वे आज हमारे अपने राज्य में ही मिल रहे हैं। हाल ही में शादी के बाद मनीष कहते हैं कि बालको ने संयंत्र के वातावरण को लेकर मेरी सोच बदल दी है। यहां हरा-भरा परिसर, परिवार के लिए आवास और अच्छा कार्य-जीवन संतुलन मिलता है। आज जब जूनियर मुझसे सलाह लेते हैं, तो मैं गर्व से अपने काम और संगठन दोनों के बारे में बताता हूं।

    ऐसे समय में जब अवसर अक्सर दूरी की मांग करते हैं, बालको एक स्थायी और समावेशी विकल्प प्रस्तुत करती है, ऐसी प्रगति, जो अपनी जड़ों में पनपती है और समुदाय को भीतर से सशक्त बनाती है। बालको के 70 प्रतिशत से अधिक प्रत्यक्ष कर्मचारी और 80 प्रतिशत से ज्यादा अप्रत्यक्ष कर्मचारी छत्तीसगढ़ से ही हैं। कंपनी स्थानीय प्रतिभाओं को पहचान कर उन्हें आगे बढ़ने का मंच देती है।

    शॉपफ्लोर से लेकर तकनीकी, सुपरवाइजरी और प्रबंधन स्तर तक, बालको योग्यता और क्षमता के अनुसार अवसर प्रदान करता है। इस तरह बालको न सिर्फ छत्तीसगढ़ के विकास में योगदान दे रहा है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के सपने को भी साकार कर रहा है। यही कारण है कि बालको आज भारत की एक प्रतिष्ठित और भरोसेमंद एल्यूमिनियम कंपनी के रूप में पहचानी जाती है।

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    Ramesh Verma
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