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    Home»कोरबा»जंगल की पवित्र धरती पर इतिहास: राज्यपाल श्री रमेन डेका की उपस्थिति में 108 निर्धन कन्याओं का विवाह, दिव्य श्री हनुमंत कथा का भव्य समापन
    कोरबा

    जंगल की पवित्र धरती पर इतिहास: राज्यपाल श्री रमेन डेका की उपस्थिति में 108 निर्धन कन्याओं का विवाह, दिव्य श्री हनुमंत कथा का भव्य समापन

    Ramesh VermaBy Ramesh VermaApril 2, 2026
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    0 अपना घर सेवा समिति ने रचा सेवा, संस्कार और सनातन वैभव का अद्भुत अध्याय — सर्वमंगला मंदिर के पुजारी प्रबंधक नन्हा नमन पाण्डेय के सहयोग से ढपढप बना आस्था का महासंगम

    कोरबा, जिले के वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम ढपढप (बांकीमोंगरा) की पावन धरती पर आयोजित दिव्य श्री हनुमंत कथा का समापन ऐसा ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक दृश्य बनकर सामने आया, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्ति, सेवा और सनातन चेतना से सराबोर कर दिया।
    घने जंगलों और प्राकृतिक शांति के बीच आयोजित यह पांच दिवसीय आयोजन केवल कथा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आस्था, मानवता, नारी सम्मान, सामाजिक समरसता और लोककल्याण का विराट महायज्ञ बन गया।
    इस भव्य आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि 108 निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह अत्यंत गरिमामय और धार्मिक वातावरण में संपन्न कराया गया।
    और इस पावन अवसर को और भी ऐतिहासिक बना दिया छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका की गरिमामयी उपस्थिति ने, जिन्होंने स्वयं उपस्थित होकर सभी नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान किया तथा उनके समक्ष वरमाला के साथ विवाह समारोह का शुभारंभ हुआ।
    राज्यपाल की उपस्थिति ने इस आयोजन की गरिमा को कई गुना बढ़ा दिया और यह कार्यक्रम पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बन गया।
    छत्तीसगढ़ में राज्यपाल के रूप में श्री रमेन डेका वर्तमान में पदस्थ हैं।
    अपना घर सेवा समिति ने किया ऐतिहासिक और अनुकरणीय आयोजन
    इस पूरे विराट और सुव्यवस्थित धार्मिक-सामाजिक आयोजन को अपना घर सेवा समिति ने अत्यंत समर्पण, सेवा भाव और शानदार व्यवस्थाओं के साथ संपन्न कराया।
    समिति ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि संकल्प सेवा का हो और भावना लोककल्याण की हो, तो जंगल के बीचों-बीच भी ऐसा दिव्य और ऐतिहासिक आयोजन संभव है, जिसे लोग वर्षों तक याद रखें।
    कथा स्थल की व्यवस्था, श्रद्धालुओं के स्वागत, विवाह कार्यक्रम, धार्मिक अनुशासन, सेवाकार्य, मंचीय गरिमा और आयोजन की भव्यता—हर स्तर पर अपना घर सेवा समिति की सक्रिय और प्रेरक भूमिका स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
    नन्हा महाराज का मिला विशेष सहयोग, आयोजन की गरिमा हुई और ऊंची
    इस पुण्य और भव्य आयोजन में सर्वमंगला मंदिर के पुजारी प्रबंधक नन्हा महाराज का भी विशेष सहयोग, सहभागिता और आध्यात्मिक समर्थन प्राप्त हुआ।
    उनकी उपस्थिति और सहयोग ने आयोजन को और अधिक श्रद्धामय, ऊर्जावान और धार्मिक स्वरूप प्रदान किया।
    नन्हा महाराज ने इस पूरे आयोजन में अपनी आध्यात्मिक सहभागिता से इसे केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के महापर्व का स्वरूप प्रदान किया।
    जंगल के बीचों-बीच उमड़ा आस्था का ऐसा सैलाब कि पंडाल भी पड़ गया छोटा
    ग्राम ढपढप जैसे वनांचल क्षेत्र में श्रद्धालुओं का ऐसा अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा कि विशाल पंडाल भी छोटा पड़ गया।
    कोरबा जिले के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में कथा स्थल पहुंचे।
    सड़कें, रास्ते, गांव की गलियां, कथा स्थल और आसपास का पूरा क्षेत्र श्रद्धालुओं की भीड़ से भरा नजर आया।
    स्थानीय ग्रामीणों और गांववासियों के लिए यह दृश्य किसी चमत्कार से कम नहीं था।
    लोग आश्चर्यचकित थे कि जंगलों के बीच स्थित एक छोटे से ग्राम में इतना विराट धार्मिक आयोजन, इतनी विशाल भीड़ और इतनी भव्य व्यवस्था देखने को मिलेगी।
    पूरा वातावरण “जय श्रीराम”, “जय बजरंगबली” और “बागेश्वर धाम सरकार की जय” के जयघोष से गूंजता रहा।
    श्रद्धा, भक्ति और सनातन ऊर्जा का ऐसा दृश्य पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक रूप से झंकृत करता रहा।
    108 निर्धन कन्याओं का विवाह बना आयोजन का सबसे पावन और प्रेरक अध्याय
    इस पांच दिवसीय दिव्य श्री हनुमंत कथा का सबसे पुण्यदायी और भावुक क्षण वह रहा, जब 108 निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक गरिमा के साथ संपन्न कराया गया।
    यह केवल विवाह कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाजसेवा, संस्कार और नारी सम्मान का जीवंत उत्सव बन गया।
    उपस्थित हजारों श्रद्धालु इस आयोजन में बाराती भी बने और घराती भी, जिससे पूरा वातावरण पारिवारिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक हो उठा।
    जहां एक ओर बेटियों के हाथ पीले हुए, वहीं दूसरी ओर हजारों लोगों ने यह अनुभव किया कि सच्चा धर्म वही है, जो किसी के जीवन में खुशियां भर दे।
    निर्धन कन्याओं का विवाह क्यों माना जाता है महान पुण्य?
    सनातन संस्कृति में कन्यादान को सबसे श्रेष्ठ दानों में से एक माना गया है।
    जब समाज किसी निर्धन कन्या के विवाह में सहयोग करता है, तब वह केवल एक विवाह नहीं कराता, बल्कि—
    एक बेटी का जीवन संवारता है
    एक परिवार की चिंता दूर करता है
    समाज में सहयोग और समरसता बढ़ाता है
    दहेज और दिखावे जैसी कुरीतियों को कमजोर करता है
    धर्म को व्यवहारिक रूप में स्थापित करता है
    इस दृष्टि से देखा जाए तो ढपढप की धरती पर हुआ 108 निर्धन कन्याओं का विवाह वास्तव में महादान, महापुण्य और लोकसेवा का अद्भुत उदाहरण बन गया।
    जंगल की यह धरती अब केवल ग्राम नहीं, तीर्थ बन गई
    ग्राम ढपढप का यह वनांचल क्षेत्र पहले अपनी प्राकृतिक शांति और ग्रामीण सादगी के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यह स्थान भक्ति, सेवा और सनातन संस्कृति की नई पहचान बन गया है।
    जहां हनुमंत कथा गूंजी हो,
    जहां संतों का आशीर्वाद मिला हो,
    जहां 108 बेटियों के विवाह संपन्न हुए हों,
    और जहां राज्यपाल की उपस्थिति में वरमाला का शुभारंभ हुआ हो—
    वह भूमि केवल भूमि नहीं रहती, वह तीर्थधाम बन जाती है।
    श्रद्धालुओं का मानना रहा कि इस आयोजन के बाद ढपढप की धरती और भी अधिक पवित्र, पूज्य और पुण्यमयी हो गई है।
    कथा ने जगाई भक्ति, सेवा ने जीत लिया सबका मन
    पांच दिनों तक चले इस आयोजन में श्री बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज की कथा, प्रवचन और आध्यात्मिक संदेशों ने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति, संस्कार और सनातन चेतना का नया संचार किया।
    उनकी वाणी ने केवल धार्मिक भाव नहीं जगाए, बल्कि समाज को सेवा, धर्म, राष्ट्र, संस्कृति और मानवता का भी संदेश दिया।
    समापन दिवस पर कथा स्थल में उपस्थित श्रद्धालुओं की संख्या इस बात का प्रमाण थी कि यह आयोजन जन-जन की आस्था का केंद्र बन चुका था।
    भक्ति, सेवा और संस्कार का अमिट इतिहास रच गया ढपढप
    ग्राम ढपढप (बांकीमोंगरा) में संपन्न यह आयोजन आने वाले समय में कोरबा जिले के सबसे भव्य, सबसे पुण्यदायी और सबसे ऐतिहासिक धार्मिक आयोजनों में गिना जाएगा।
    इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि—
    जहां सेवा हो,
    जहां संतों का आशीर्वाद हो,
    जहां बेटियों के जीवन संवरें,
    जहां समाज एक परिवार बन जाए,
    वहीं सच्चे अर्थों में सनातन का वैभव प्रकट होता है।
    ढपढप की यह पावन धरती अब केवल एक गांव नहीं, बल्कि आस्था, सेवा, संस्कार और सनातन एकता का जीवंत प्रतीक बन चुकी है।

    उक्त आयोजन में मां सर्वमंगला मंदिर के पुरोहित मयंक पांडेय, राणा मुखर्जी, जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह, सुबोध सिंह अमरजीत सिंह,अखिलेश अग्रवाल, विजय राठौर , इत्यादि की अहम भूमिका रही।

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